राजस्थान के राष्ट्रिय उधान

राजस्थान के  राष्ट्रिय उधान 


रणथम्बोर  राष्रीय उधान - सवाई माधोपुर  इसे 1955  में वन्यजीव अभ्यारण्य घोषित क्या गया   भारत कि प्रथम बाघा परियोजना यहा 1  अप्रेल1973 को शुरू कि गई    
 रणथंबोर  राज्य का प्रथम राष्ट्रिय उधान है । 2008  को यहा दुनिया कि प्रथम बाघ विस्थापन घटना रणथम्भोर अभ्यारण्य  से बाघ सुल्तान तथा बबली बाघिन को रणथम्बोर से सरिस्का वन्य जिव अभ्यारण्य  में  स्थांतरित किया
कैलाश सांखला -   इन्हे टाइगर मेन  ऑफ़ इंडिया खा जाता है । इन्हे हालही में2012 में  राजस्थान रत्न दिया गया है
ये भारत में  बाघ परियोजना के जनक है    बाघ परियाजना के प्रथम महानिदेशक थे
रेड डेटा बुक में बाघ का नाम शामिल करने का श्रेय इन्हे ही जाता है 



केवला देव घना पक्षी अभ्यारण्य  -  भरतपुर -- इस वन्य जिव अभ्यारण्य 1956  को बनाया गया
प्राचीन शिव मंदिर के नाम पर इस अभ्यारण्य का नाम पड़ा । यह एशिया कि सबसे बड़ी पक्षियों कि  प्रजनन स्थली है यहा सर्वाधिक मात्रा  में साइबेरियन सारस आते है  यहा पाई जाने  वाली ऐंचा नामक घास में फसकर सबसे अधिक पक्षियों कि मृत्यु हो जाती  है ।   इस अभ्यारण्य को पानी अजान बांध  से मिलता है ।
1985  को इस अभ्यारण्य को  यूनेस्को ने विश्व प्राकृतिक विश्व धरोहर में शामिल किया है ।



मुकुंदरा हिल्स राष्ट्रिय उधान  -कोटा  झालावाड  9 जनवरी 2012  को राष्ट्रिय उधान बनाने कि अधसूचना  जारी कि  प्रारम्भ में इसका नाम दर्रा वन्य जिव अभ्यारण्य था 2003  में गहलोत सरकार ने इसका नाम राजीव गांधी राष्ट्रीय उधान कर दिया 2006  में वसुंधरा सरकार ने इसका नाम मुकुंदरा हिल्स था इसे राष्ट्रिय उधान बनाने कि घोषणा कि इस राष्ट्रिय उधान में  हीरामन  जाती के गगरौनी  तोते पाये जाते है जो मनुष्य  जैसी आवाज निकालते  है । यह रानी  पद्मनी का प्रिय तोता था ।  इस उधान में अबली मिनी का महल है जिसे राजस्थान का दूसरा ताजमहल कहते है नोट - राजस्थान का ताजमहल जसवंत थड़ा है इस अभ्यारण्य में गुप्तकालीन हुणो  द्वारा निर्मित प्राचीन शिव मंदिर है  



सरिस्का वन्य जिव अभ्यारण्य -अलवर राजस्थान कि दूसरी बाघ परियोजना  1978 में प्रारम्भ कि गई यह अभ्यारण्य NH 11  पर स्थित  है था स्वर्ण त्रिकोण  पर स्थित है । इस अभ्यारण्य कि प्रमुख विशेषता यहा हरे कबूतर पाया जाना है । यहा नीलकंठेश्वर  का मंदिर है । यहा भृतहरि कि तपो स्थली है । जो राजस्थान में कनफटे नाथो कि प्रमुख पीठ है
NOTE -नाथ सम्प्रदाय कि अन्य पीठ -           प्रमुख पीठ -  महा मंदिर जोधपुर             बैरागपंथी  नाथो कि पीठ  - राताड़ूँगा  पुष्कर


                                                                                                                                                              बंध बरैठा -भरतपुर इसे परिंदो का घर  कहा  है ।यह जरखो के लिए प्रसिद है ।  यहा  वर्त्तमान में       पान कि खेती होती है । मुग़ल काल में यहा नील कि खेती होती थी          
NOTE -मोरासागर राजस्थान का दूसरा स्थान है जहा पान  कि खेती होती है । पान  के खेत को बजैड़ा कहते है । पान कि खेती करने वाली जाती को तमोली कहते है 



राष्ट्रीय मरू उधान -जैसलमेर ,बाड़मेर  में स्थित है । यह राजस्थान का क्षेत्रफल कि दृष्टि से सबसे बड़ा वन्य जीव अभ्यारण्य है । अभ्यारण्य का क्षेत्रफल 3162 किमी है।  यहाँ पर राज्य पक्षी गोडावण पाया जाता है।
NOTE -गोडावण राजस्थान में तीन स्थानो पर पाया जाता है। 1. सोरसन -बारां 2. संखलिया -अजमेर
आकलवुड पार्क जैसलमेर में है।  यहा चूहे के दांत के अवशेष मिले है। इस उधान के क्षेत्र में लगभग 60  किमी
लम्बी सेवण  घास कि पट्टी है। सेवण  घास का स्थानीय नाम लिलोण है। इस उधान में पश्चिम राजस्थान का सबसे जहरीला सांप पीवणा पाया जाता है।




गजनेर वन्य जीव अभयारण्य -बीकानेर प्रमुख विशेषता यहाँ बटबड पक्षी पाया जाता है। जिसे रेत का तीतर  कहा  जाता है।  वैज्ञानिक नाम सैडगाउन   है।




तालछापर - चुरू -पुराना नाम द्रोणपुर। इसकी प्रमुख विशेषता काले हरिण  है राजस्थान कि अत्यंत नरम घास मोचिया साइप्रस रोटेण्डस पाई जाती है। कुरंजा पक्षी भी पाये जाते है NOTE -राजस्थान में कुरंजा पक्षी सर्वाधिक खींचन गाँव जोधपुर में है।  तालछापर  खारे पानी कि झील है।


नाहरगढ़ वन्य जीव अभ्यारण्य -जयपुर -यहा राज्य का प्रथम व भारत का दूसरा  जैविक उधान स्थापित किया गया है। यहा भारत का तीसरा बियर रेस्क्यू सेंटर  स्थापित किया गया है।



कुम्भलगढ़  वन्य जीव अभ्यारण्य -राजसमंद पाली अजमेर  -यह भेड़िये कि प्रजनन स्थली है।यह राजस्थान का एकमात्र अभ्यारण्य है जिसका पानी बंगाल की खाड़ी  में तथा अरब सागर में जाता है। रणकपुर के जैन मंदिर मथाई नदी पर आदिनाथ  को समर्पित है।







माउन्ट आबू वन्य जीव अभ्यारण्य - सिरोही - यह अभ्यारण्य जंगली मुर्गो के लिए प्रसिद  है।





जयसमंद वन्य जीव अभ्यारण्य -उदयपुर -सर्वाधिक बघेरे पाये जाते है। जलचरो कि बस्ती है।




फुलवारी कि नाल - उदयपुर  देश का प्रथम ह्यूमन एनाटॉमी पार्क कि स्थापना मानसी  वाकल का उद्गम स्थल और सोम नदी इसमें से प्रवाहित होती है। NOTE -देश कि प्रथम पेयजल आधारित जल सुरंग परियोजना  मानसी  वाकल  परियोजना है। 



बस्सी अभ्यारण्य - चितोडगढ़ -यहा बाघ विचरण करते थे  ओरई व बामनी नदियो का उदग्म  स्थल है।






सीता माता वन्य जीव अभ्यारण्य -प्रतापगढ़  -सर्वाधिक जैव विविधता वाला अभ्यारण्य है। हिमालय पर्वत के बाद में सावधिक ओषधीय पौधे यही पाये जाते है।  इस अभ्यारण्य को चीतलों कि भूमि खा जाता है।
यहा सागवान के वैन मिलते है। यह उड़न गिलहरियों के के लिए प्रसिद है  जो महुआ पेड़ कि कोटरों में पाई जाती है। यहा लव -कुश नाम के दो झरने है




जवाहर सागर वन्य जीव अभ्यारण्य - कोटा -सर्वाधिक मगरमच्छ पाये जाते है उतर भारत का प्रथम सर्प उधान इसी अभ्यारण्य में है। राजस्थान कि प्रथम विष प्रयोगशाला  है  दूसरा सर्प उधान भरतपुर में स्थापित किया जायेगा 



राष्ट्रिय चम्बल घड़ियाल अभ्यारण्य -उत्तरप्रदेश- मध्यप्रदेश-राजस्थान -इसे घड़ियालों का संसार कहते है।
यह राजस्थान का एकमात्र अंतर्राजीय अभ्यारण्य है। जो राजस्थान ,मध्यप्रदेश ,उत्तरप्रदेश  में फैला है।
इस अभ्यारण्य कि अन्य विशेषता -यहा डॉल्फिन मछली {गांगियांसूंग }पायी जाती है। 



सज्ज्नगढ़ वन्य जीव अभ्यारण्य -उदयपुर -यह राजस्थान का सबसे छोटा अभ्यारण्य है। यह नील गाय ,लोमड़ी के लिए प्रसिद है। इसका क्षेत्रफल 5. 19 किमी है




शेरगढ़ वन्य जीव अभ्यारण्य  - बारां -इसे सांपो कि शरणस्थली कहा जाता है। इसमें से परवन नदी प्रवाहित होती है।




रामगढ विषधारी वन्य जीव अभ्यारण्य -बूंदी -राजस्थान में बाघ परियोजना के अलावा झा बाघ स्व्तंत्र रूप से विचरण करते देखे जा सकते है।



टॉडगढ़ रावली वन्य जीव अभ्यारण्य -पाली राजसमंद  अजमेर -यह तीन जिलो में फैला है। इस अभ्यारण्य में टॉडगढ़ किला स्थित है।





भैसरोडग़ढ़ वन्य जीव अभ्यारण्य -चितौड़गढ़ -


जमुवायरामगढ़ वन्य जीव अभ्यारण्य -जयपुर - इस भयारण्य में रामगढ़ झील स्थित है जिसमे 1982 के एशियाई खेलो के दोरान रामगढ़ झील में नौकायन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।



केसरबाग  -धोलपुर 


राम सागर -धोलपुर 

वनविहार -धोलपुर 

कनकसागर पक्षी अभ्यारण्य -बूंदी 

कैलादेवी वन्य जीव अभ्यारण्य - करौली 





राजस्‍थान के नए मंत्री

 राजस्‍थान के नए  मंत्री



मुख्‍यमंत्री वसुंधरा राजे                                                                                                                                                                                   वित्‍त, पर्यटन, कार्मिक, प्रशासनिक सुधार, संप्रदा, सांख्‍ियकी,आबकारी                                                     नगरीय विकास,  श्रम, सैनिक कल्‍याण, देवस्‍थान, प्‍लानिंग



 गुलाबचंद कटारिया                              ग्रामीण विकास और आपदा प्रबंधन 

  राजेन्द्र राठौड़                                       चिकित्सा एवं स्वास्थ्य 

  नंद लाल मीणा                                     जनजाति विकास विभाग 

 कालीचरण सराफ                                   शिक्षा मंत्री 

 यूनुस खान                                              पीडब्ल्यूडी मंत्री

राजेन्द्र सिंह खींवसार                                ऊर्जा मंत्री

प्रभुलाल सैनी                                       कृषि विभाग

कैलाश मेघवाल                                        खान मंत्री

अरुण चतुर्वेदी                                सामाजिक न्याय 

 अजय सिंह                                    सहकारिता मंत्री

 हेमसिंह भडाना                                खाद्य आपूर्ति मंत्री

सांवरलाल जाट                             जल संसाधन विभाग

अजयसिंह किलक                         सहकारिता मंत्री


खारे पानी की झील

साँभर झील - यह राजस्थान की सबसे बड़ी झील है। इसका अपवाह क्षेत्र ५०० वर्ग किलोमीटर में फैला है। यह झील दक्षिण-पूर्व से उत्तर-पश्चिम की ओर लगभग ३२ किलोमीटर लंबी तथा ३ से १२ किलोमीटर तक चौड़ी है। ग्रीष्मकाल में वाष्पीकरण की तीव्र दर से होने के कारण इसका आकार बहुत कम रह जाता है। इस झील में प्रतिवर्ग किलोमीटर ६०,००० टन नमक होने का अनुमान है। इसका क्षेत्रफल १४५ वर्ग किलोमीटर है। इसके पानी से नमक बनाया जाता है। यहां सोड़ियम सल्फेट संयंत्र स्थापित किया गया है जिससे ५० टन सोड़ियम सल्फेट प्रतिदिन बनाया जाता है। यह झील जयपुर और नागौर जिले की सीमा पर स्थित है तथा यह जयपुर की फुलेरा तहसील में पड़ता है।
     
 डीड़वाना झील - यह खारी झील नागौर जिले के डीड़वाना नगर के समीप स्थित है। यह ४ किलोमीटर लंबी है तथा इससे भी नमक तैयार किया जाता है। डीड़वाना नगर से ८ किलोमीटर दूर पर सोड़ियम सल्फेट का यंत्र लगाया गया है। इस झील में उत्पादित नमक का प्रयोग बीकानेर तथा जोधपुर जिलों में किया जाता है।
पंचभद्रा झील - बाड़मेर जिले में पंचभद्रा नगर के निकट यह झील स्थित है। यह लगभग २५ वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर स्थित है। यह झील वर्षा के जलपर निर्भर नही है बल्कि नियतवाही जल श्रोतों से इसे पर्याप्त खारा जल मिलता रहता है। इसी जल से नमक तैयार किया जाता है जिसमें ९८ प्रतिशत तक सोड़ियम क्लोराइड़ की मात्रा है।


राजस्थान का एकीकरण



राजस्थान भारत का एक महत्ती प्रांत है। यह तीस मार्च 1949 को भारत का एक ऐसा प्रांत बना जिसमें तत्कालीन राजपूताना की ताकतवर रियासतों ने विलय किया। इसी कारण इसका नाम राजस्थान बना। राजस्थान यानि राजपूतो का स्थान,इसका नाम राजस्थान होने के पीछे यही एकमात्र मजबूत तर्क है। अगर राजपूताना की देशी रियासतों के विलय के बाद बने इस राज्य की कहानी देखे तो यह प्रासंगिक भी लगता है।भारत के संवैधानिक इतिहास में राजस्थान का निर्माण एक महत्वपूर्ण उपलब्धि थी । ब्रिटिश शासको द्वारा भारत को आजाद करने की घोषणा करने के बाद जब सत्ता हस्तांतरण की कार्यवाही शुरू की तभी लग गया था कि आजाद भारत का राजस्थान प्रांत बनना और राजपूताना के तत्कालीन हिस्से का भारत में विलय एक दूभर कार्य साबित हो सकता है। आजादी की घोषणा के साथ ही राजपूताना के देशी रियासतों के मुखियाओं में स्वतंत्र राज्य में भी अपनी सत्ता बरकरार रखने की होड सी मच गयी थी , उस समय वर्तमान राजस्थान की भौगालिक स्थिति के नजरिये से देखे तो राजपूताना के इस भूभाग में कुल बाइस देशी रियासते थी। इनमें एक रियासत अजमेर मेरवाडा प्रांत को छोड शेष देशी रियासतों पर देशी राजा महाराजाओं का ही राज था। अजमेर-मेरवाडा प्रांत पर ब्रिटिश शासको का कब्जा था इस कारण यह तो सीघे ही स्वतंत्र भारत में आ जाती, मगर शेष इक्कीस रियासतो का विलय होना यानि एकीकरण कर राजस्थान नामक प्रांत बनाना था। सत्ता की होड के चलते यह बडा ही दूभर लग रहा था क्योंकि इन देशी रियासतों के शासक अपनी रियासतों का स्वतंत्र भारत में विलय को दूसरी प्राथमिकता के रूप में देख रहे थे। उनकी मांग थी कि वे सालों से शासन चलाते आ रहे है। उन्हें शासन करने का अनुभव है । इस कारण उनकी रियासत को स्वतंत्र राज्य का दर्जा दे दिया जाए । करीब एक दशक की उहापोह के बीच 18 मार्च 1948 को शुरू हुयी राजस्थान के एकीकरण की प्रक्रिया। कुल सात चरण में एक नवंबर 1956 को पूरी हुयी । इसमें भारत सरकार के तत्कालीन देशी रियासती मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल और उनके सचिव वी पी मेनन की भूमिका महत्ती साबित हुयी । इनकी सूझबूझ से ही राजस्थान का निर्माण हो सका

पहला चरण- 18 मार्च 1948

सबसे पहले अलवर , भरतपुर, धौलपुर, व करौली नामक देशी रियासतो का विलय कर तत्कालीन भारत सरकार ने फरवरी 1948 मे अपने विशेषाधिकार का इस्तेमाल कर मत्स्य यूनियन के नाम से पहला संध बनाया। यह राजस्थान के निर्माण की दिशा में पहला कदम था। इनमें अलवर व भरतपुर पर आरोप था कि उनके शासक राष्टृविरोधी गतिविधियों में लिप्त थे। इस कारण सबसे पहले उनके राज करने के अधिकार छीन लिए गए व उनकी रियासत का कामकाज देखने के लिए प्रशासक नियुक्त कर दिया गया। इसी की वजह से राजस्थान के एकीकरण की दिशा में पहला संघ बन पाया । यदि प्रशासक न होते और राजकाज का काम पहले की तरह राजा ही देखते तो इनका विलय असंभव था क्योंकि इन राज्यों के राजा विलय का विरोध कर रहे थे।18 मार्च 1948 को मत्स्य संघ का उद़घाटन हुआ और धौलपुर के तत्कालीन महाराजा उदय सिंह को इसका राजप्रमुख मनाया गया। इसकी राजधानी अलवर रखी गयी थी। मत्स्य संध नामक इस नए राज्य का क्षेत्रफल करीब तीस हजार किलोमीटर था। जनसंख्या लगभग 19 लाख और आय एक करोड 83 लाख रूपए सालाना थी। जब मत्स्य संघ बनाया गया तभी विलय पत्र में लिख दिया गया कि बाद में इस संघ का राजस्थान में विलय कर दिया जाएगा।

दूसरा चरण 25 मार्च 1948

राजस्थान के एकीकरण का दूसरा चरण पच्चीस मार्च 1948 को स्वतंत्र देशी रियासतों कोटा, बूंदी, झालावाड, टौंक, डूंगरपुर, बांसवाडा, प्रतापगढ , किशनगढ और शाहपुरा को मिलाकर बने राजस्थान संघ के बाद पूरा हुआ। राजस्थान संध में विलय हुई रियासतों में कोटा बडी रियासत थी इस कारण इसके तत्कालीन महाराजा महाराव भीमसिंह को राजप्रमुख बनाया गया। के तत्कालीन महाराव बहादुर सिंह राजस्थान संघ के राजप्रमुख भीमसिंह के बडे भाई थें इस कारण उन्हे यह बात अखरी की कि छोटे भाई की राजप्रमुखता में वे काम कर रहे है। इस ईर्ष्या की परिणति तीसरे चरण के रूप में सामने आयी।

तीसरा चरण 18 अप्रैल 1948

बूंदी के महाराव बहादुर सिंह नहीं चाहते थें कि उन्हें अपने छोटे भाई महाराव भीमसिंह की राजप्रमुखता में काम करना पडें, मगर बडे राज्य की वजह से भीमसिंह को राजप्रमुख बनाना तत्कालीन भारत सरकार की मजबूरी थी। जब बात नहीं बनी तो बूंदी के महाराव बहादुर सिंह ने उदयपुर रियासत को पटाया और राजस्थान संघ में विलय के लिए राजी कर लिया। इसके पीछे मंशा यह थी कि बडी रियासत होने के कारण उदयपुर के महाराणा को राजप्रमुख बनाया जाएगा और बूंदी के महाराव बहादुर सिंह अपने छोटे भाई महाराव भीम सिंह के अधीन रहने की मजबूरी से बच जाएगे और इतिहास के पन्नों में यह दर्ज होने से बच जाएगा कि छोटे भाई के राज में बडे भाई ने काम किया। अठारह अप्रेल 1948 को राजस्थान के एकीकरण के तीसरे चरण में उदयपुर रियासत का राजस्थान संध में विलय हुआ और इसका नया नाम हुआ संयुक्त राजस्थान संघ। माणिक्य लाल वर्मा के नेतृत्व में बने इसके मंत्रिमंडल में उदयपुर के महाराणा भूपाल सिंह को राजप्रमुख बनाया गया कोटा के महाराव भीमसिंह को वरिष्ठ उपराजप्रमुख बनाया गया। इसीके साथ बूंदी के महाराजा की चाल भी सफल हो गयी।

चौथा चरण तीस मार्च 1949

इससे पहले बने संयुक्त राजस्थान संघ के निर्माण के बाद तत्कालीन भारत सरकार ने अपना ध्यान देशी रियासतों जोधपुर , जयपुर, जैसलमेर और बीकानेर पर केन्द्रित किया और इसमें सफलता भी हाथ लगी और इन चारों रियासतो का विलय करवाकर तत्कालीन भारत सरकार ने तीस मार्च 1949 को ग्रेटर राजस्थान संघ का निर्माण किया, जिसका उदघाटन भारत सरकार के तत्कालीन रियासती मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल ने किया। यहीं आज के राजस्थान की स्थापना का दिन माना जाता है। इस कारण इस दिन को हर साल राजस्थान दिवस के रूप में मनाया जाता है। हांलांकि अभी तक चार देशी रियासतो का विलय होना बाकी था, मगर इस विलय को इतना महत्व नहीं दिया जाता है , क्योंकि जो रियासते बची थी वे पहले चरण में ही मत्स्य संघ के नाम से स्वतंत्र भारत में विलय हो चुकी थी। अलवर , भतरपुर, धौलपुर व करौली नामक इन रियासतो पर भारत सरकार का ही आधिपत्य था इस कारण इनके राजस्थान में विलय की तो मात्र औपचारिकता ही होनी थी।

पांचवा चरण 15 अप्रेल 1949

पन्द्रह अप्रेल 1949 को मत्स्य संध का विलय ग्रेटर राजस्थान में करने की औपचारिकता भी भारत सरकार ने निभा दी। भारत सरकार ने 18 मार्च 1948 को जब मत्स्य संघ बनाया था तभी विलय पत्र में लिख दिया गया था कि बाद में इस संघ का राजस्थान में विलय कर दिया जाएगा। इस कारण भी यह चरण औपचारिकता मात्र माना गया।

छठा चरण 26 जनवरी 1950

भारत का संविधान लागू होने के दिन 26 जनवरी 1950 को सिरोही रियासत का भी विलय ग्रेटर राजस्थान में कर दिया गया। इस विलय को भी औपचारिकता माना जाता है क्योंकि यहां भी भारत सरकार का नियंत्रण पहले से ही था। दरअसल जब राजस्थान के एकीकरण की प्रक्रिया चल रही थी, तब सिरोही रियासत के शासक नाबालिग थे। इस कारण सिरोही रियासत का कामकाज दोवागढ की महारानी की अध्यक्षता में एजेंसी कौंसिल ही देख रही थी जिसका गठन भारत की सत्ता हस्तांतरण के लिए किया गया था। सिरोही रियासत के एक हिस्से आबू देलवाडा को लेकर विवाद के कारण इस चरण में आबू देलवाडा तहसील को बंबई और शेष रियासत विलय राजस्थान में किया गया।

सांतवा चरण एक नवंबर 1956

अब तक अलग चल रहे आबू देलवाडा तहसील को राजस्थान के लोग खोना नही चाहते थे, क्योंकि इसी तहसील में राजस्थान का कश्मीर कहा जाने वाला आबूपर्वत भी आता था , दूसरे राजस्थानी, बच चुके सिरोही वासियों के रिश्तेदार और कईयों की तो जमीन भी दूसरे राज्य में जा चुकी थी। आंदोलन हो रहे थे, आंदोलन कारियों के जायज कारण को भारत सरकार को मानना पडा और आबू देलवाडा तहसील का भी राजस्थान में विलय कर दिया गया। इस चरण में कुछ भाग इधर उधर कर भौगोलिक और सामाजिक त्रुटि भी सुधारी गया। इसके तहत मध्यप्रदेश में शामिल हो चुके सुनेल थापा क्षेत्र को राजस्थान में मिलाया गया और झालावाड जिले के उप जिला सिरनौज को मध्यप्रदेश को दे दिया गया। इसी के साथ आज से राजस्थान का निर्माण या एकीकरण पूरा हुआ। जो राजस्थान के इतिहास का एक अति महत्ती कार्य था

राजस्थान की खनिज संपदा

   
1. फ्लोराइट खनिज के उत्पादन में राजस्थान का देश में कौनसा स्थान है।
Ans:- प्रथम
2. राजस्थान में जावर की खान किस जिले में है ? 
Ans:- उदयपुर
3. अलौह खनिज की दृष्टि से राजस्थान का देश में कौनसा स्थान है।
Ans:- प्रथम
4. लौह खनिज की दृष्टि से राजस्थान का देश में कौनसा स्थान है।
Ans:- चौथा
5. अभ्रक व तांबा उत्पादन में राजस्थान का कौनसा स्थान है।
Ans:- दूसरा
6. राजस्थान में ताम्बे के विशाल भंडार है ? 
Ans:- खेतड़ी में (झुन्झुनू जिला)
7. राजस्थान में गुलाबी रंग का ग्रेनाइट कहां पर पाया जाता है।
Ans:- जालौर
8. राजस्थान में फैल्सपार कहां पाया जाता है।
Ans:- अजमेर(ब्यावर) व भीलवाड़ा
9. सुपर जिंक समेल्टर संयत्र (ब्रिटेन के सहयोग से) कहां पर स्थापित किया गया है।
Ans:- चंदेरिया(चित्तौड़गढ़)
10. राजस्थान में सोना कहां पर पाया जाता है। 
Ans:- बांसवाड़ा व डूंगरपुर
11. हीरा राजस्थान में कहां पाया जाता है।
Ans:- केसरपुरा (चित्तौड़गढ़)
12. राजस्थान में जेम स्टोन औद्योगिक पार्क किस जिले में स्थित है।
Ans:- जयपुर
13. जिप्सम राजस्थान में सर्वाधिक कहां पर पाया जाता है। 
Ans:- नागौर ( गोट-मांगलोद) में
14. राजस्थान में चांदी की खान कहां पर स्थित है।
Ans:- जावर (उदयपुर), रामपुरा-आंगुचा (भीलवाड़ा)
15. मैंगनीज राजस्थान के किस जिलों में पाया जाता है। 
Ans:- बांसवाड़ा व उदयपुर
16. वरमीक्यूलाइट राजस्थान में कहां पर पाया जाता है।
Ans:- अजमेर
17. अभ्रक राजस्थान में सर्वाधिक कहां पर पाया जाता है। 
Ans:- भीलवाड़ा व उदयपुर
18. राजस्थान में वोलस्टोनाइट कहां पाया जाता है।
Ans:- सिरोही व डूंगरपुर
19. यूरेनियम राजस्थान में कहां पर पाया जाता है।
Ans:- उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा व सीकर

20. राजस्थान में मैग्नेसाइट कहां पर उत्पादित किया जाता है।
Ans:- अजमेर
21. सीसा-जस्ता उत्पादन में राजस्थान का देश में कौनसा स्थान है।
Ans:- प्रथम
22. मुल्तानी मिट्टी राजस्थान में कहां पाई जाती है।
Ans:- बीकानेर व बाड़मेर
23. पाइराइट्स राजस्थान में सर्वाधिक कहां पाया जाता है।
Ans:- सलादीपुर (सीकर)
24. घीया पत्थर राजस्थान में कहां पाया जाता है।
Ans:- भीलवाड़ा व उदयपुर
25. वह खनिज जो मिट्टी की क्षारियता दूर करने के काम आता है, कौनसा है ? 
Ans:- जिप्सम
26. राजस्थान में कैल्साइट कहां पाया जाता है।
Ans:- सीकर व उदयपुर
27. राजस्थान में बेराइट्स के विशाल भंडार कहां पाये गए हैं ?
Ans:- जगतपुर (उदयपुर)
28. खनन क्षेत्रों से प्राप्त आय की दृष्टि से राजस्थान का देश में कौनसा स्थान है ?
Ans:- पांचवा स्थान
29. हरी अग्नि के नाम से जाना जाता है।
Ans:- पन्ना
30. रॉक फास्फेट के राजस्थान के किन जिलों में पाया जाता है ? 
Ans:- झामर कोटड़ा (उदयपुर) व बिरमानियां (जैसलमेर) और बांसवाडा